- फुलगेन महतो
आइ आपन देशमे चर्चा शहीद दिवसके
सबके सब लोक जीयइ मजबुरीके पिसके ।
खुनके चरहौलकै,रेत,उहो हय जीन्दा बेबस ।
ओकररो निकाइल लेलकै कुछ लोक रस,
देश मे मचल , देखु चारु ओर तहस नहस ।
राष्ट्रियके लेल जे कुछ बाज आ कर चाहलकै
उ देशमे चुइनके एक -एक कके मारल गेलै ।
कहियो मुद्दा,तृष्णासे कयसके सताबल गेलै ।
इहे रबैयासे अभीयो चलै आइय कसमकस,
देश मे मचल हय्री ,देखु चारु ओर तहस नहस ।
अधिकारलया लडाइ, हरदिन होइते रहिगेलै
दु/चाइरगो सबदिन ,बहानामे मोइरते रहिगेलै ।
स्वार्थ ,सता ,अधिकारलया पियासले रहिगेलै ।
माग अधुराके सतापरमे चलैत रहलै बहस,
देशमे मचल हय , देखु चारु ओर तहस नहस ।
शहीदके नामपर देशमे ,करोडके करोड ,
हर साल नयाँ शिर्षकमे बजे बहराइ हय ।
केकरा कि पता शदीदके घर कि खाइ हय ।
अपन देश बनाइबते ,बनैबते होगेलै डन्स,
देश मे मचल हय, देखु चारु ओर तहस नहस ।
शहीदके आबो सबलोक शहीद रहदियौ
अभीयो आकश पतालमे चयनसे रहदियौ ।
जे कहके रहै कहिके चैल गेल, अपन देशसे ।
सबके सपना कि हय, जनैय ,शहीदो नसे सन,
देश मे मचल हय ,देखु चारु ओर तहस नहस ।
*** धन्यवाद *****








