- फुलगेन मगही
नागरिता बिना वियाहके
चायपति विना चायके
गर्जु विना पाईके
कोनो काम ने।
पोता विना दायके
श्रृंगार विना सायके
नहिरा विना भाईके
कोनो काम ने।
नोकरी, विना भताके
सरकारमे पार्टी विना सताके
तराजु विना काटाके
कोनो काम ने।
दोस्ती विना जिग्रीके
नोकरी विना डिग्रीके
जिबिया विना तिवरीके
कोनो काम ने।
कुर्सी विना खेलके
बैमानी विना मेलके
फोरन विना तेलके
कोनो काम ने।
जनता विना नेताके
बाप विना बेटाके
कोठी विना पेनाके
कोनो काम ने।
दारु विना नसाके
देश विना भाषाके
कलाकार विना कलाके
कोनो काम ने।
किताब विना कथाके
इन्सान विना माथाके
विद्यार्थी विना राटाके
कोनो काम ने।
नेतगिरी विना झुठके
कर्मचारी विना लुटके
करबाई विना छुटके
कोनो काम ने।
सेवा विना भावके
जिन्दगी विना अभावके
खबर विना समाधके
कोनो काम ने।








