- राममणि कुशवाहा
हाँ ई जगत के नारी हय।
ममताके परिभाषा दयाके खानी हैय
अहाँके संसारमे लबैवला माय हय।
गर्भ हय हमरा अहाँके जग्त नारीसे
अइ सृष्टिके चिनारी हय ।।
हाँ अइ संसार रुपी रंगमञ्चमे
बहुते बहुत भुमिका खेलैके क्षमता हय।
हाँ यी जगत के नारी हय ।
ऐगो भंबनके स्वर्ग जेहन
घर बनावबाला लक्ष्मी हय
सबके मुह पर हसी लाईब दैईवला बेटी हय ।
अहाँक साथ कन्धामे कन्धा मिलाक चलैवाला पत्नी हय ।
अहाँके भुख मेटाबबला अन्पुर्ना हय,
मैशा सुर सङ्गारनी दुर्गा हय ।
सौंसे महाभारत रचाबबला यंग सैनी,द्रोप्ती हय,
हाँ यी जगत के नारी है।।
अहाँके मृत सैयापरसे
लबैबला सावित्री हय ।
अहाँके मृत शरीर संग,
अग्निमे जलैवाला सतियो हय ।
सिद्धार्थ गौतम जेहन जन्मदैबाला
माँई मया सेहो हय ।
महान इशुके जन्म दैवला
माँई मरियम हय ।।
मरियदा पुरुषतम श्री रामके
जन्मदैवाला कौशिल्या हय,
श्री कृष्ण के जन्माक पालन करैवाला
देबकी आ यसोध्या हय,
हाँ यी जगत के नारी हय ।।
सुरके तार और
संगितके धनी अरुणा हय ।
युद्ध भुमिमे लडै बला
बिराङ्गंना झांशीके रानी हय।
अहाँके धरती पर लबैवला,माई सेहो हय।
जीवनके दू तिहाई आयु
अहाँके सँगे बितौने हय ।
कहियो माइक रुपमे ,
कहियो बहिनक रुपमे ,
कहियो पत्नीके रुपमे ,
त कहियो बेटिके रुपमे ,
सदा साथ अहाँक देले हय ।
हाँ यी जगत के नारी है ।।
सति अन्सुया मात्रे नै चंडियो हय
अहाँके नङ्गा पारैबला द्रौपती मात्रे नै सृखंडि यो हय ।
सकब त सहयोगी बनु नै त, साबधान भजाउ दुष्ट,
आदियो नारी हय त,अंतो नारी हय।
हाँ यी जगत के नारी हय।।
(लेखक धनुषाके बटेश्वर गाउँपालिका वार्ड नं ३ के वार्ड अध्यक्ष हथिन्)








